Pandit Shubham Parashar
वेद मूर्ति पंडित शुभम पाराशर
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Vedic Scholar & Jyotish Acharya
राजस्थान, अजमेर — केकड़ी
वेद मूर्ति पंडित शुभम पाराशर का जन्म राजस्थान में अजमेर जिले के केकड़ी प्रांत में ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिताजी का नाम श्री मान रामपाल जी पाराशर और माता जी का नाम श्री मती राजकुमारी पाराशर है। बचपन से ही धार्मिक क्रियाओं और परिवार के संस्कार से उनकी रुचि धार्मिकता और भगवान की सेवा-पूजा में रही।
सामान्य पढ़ाई के बाद पुष्कर के ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ गुरुकुल में प्रवेश लिया और गुरु-शिष्य परंपरा से पूज्य श्री श्री राम गुरु जी के सानिध्य में ६ वर्ष रहकर शुक्ल यजुर्वेद का अध्ययन एवं कर्मकांड का अध्ययन किया।
पुष्कर के गुरुकुल में गुरु जी के सानिध्य में रहते हुए उज्जैन के महर्षि संदीपनी वेद विद्यालय से वेद विभूषण की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात जयपुर में ६ वर्ष रहकर शुक्ल यजुर्वेद में शास्त्री एवं आचार्य की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद काशी में रहकर गुरु-शिष्य परंपरा से ज्योतिष का अध्ययन किया एवं डिग्री प्राप्त की।
गुरु जी की कृपा से २ वर्ष भारत से बाहर विदेश में रहकर धार्मिक क्रियाओं को सम्पन्न किया एवं मंदिर निर्माण करवाया। आचार्य जी से अनेक सेलिब्रिटी — संजय दत्त आदि — एवं राजनीतिज्ञ पूजा-अर्चना एवं ज्योतिष परामर्श लेते हैं।
वर्तमान में संपूर्ण भारतवर्ष एवं विदेश में पूजा-अर्चना एवं ज्योतिषीय परामर्श से लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके कोमल और निर्मल स्वभाव, कर्म के प्रति निष्ठा, निस्वार्थ सेवा भाव एवं भगवत-प्रेम के कारण भक्तगण उनसे ज्योतिष परामर्श और पूजा विधि से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
Educational Journey
Pushkar, Rajasthan
Brahma Savitri Vedic Gurukul
6 वर्ष — शुक्ल यजुर्वेद अध्ययन एवं कर्मकांड प्रशिक्षण, गुरु-शिष्य परंपरा
Ujjain, Madhya Pradesh
Maharshi Sandipani Vedic Vidyalay
वेद विभूषण उपाधि — पूज्य गुरुजी के सानिध्य में
Jaipur, Rajasthan
Shastri & Acharya — Shukla Yajurveda
6 वर्ष — शास्त्री एवं आचार्य की उपाधि प्राप्त
Kashi (Varanasi)
Jyotish Acharya
गुरु-शिष्य परंपरा से ज्योतिष अध्ययन एवं प्रमाणपत्र
Areas of Expertise
Sawan Anushthan
सावन अनुष्ठान
Rudra Abhishek
रुद्र अभिषेक
Mahamrityunjay Jaap
महामृत्युंजय जाप
Jyotish Consultancy
ज्योतिष परामर्श
Temple Consecration
मंदिर प्रतिष्ठा
Karmakand Rituals
कर्मकांड पूजा विधि
उनके कोमल और निर्मल स्वभाव, कर्म के प्रति निष्ठा एवं निस्वार्थ सेवा भाव के कारण भगवत-प्रेमी उनसे ज्योतिष परामर्श और पूजा विधि से बहुत प्रसन्न होते हैं।
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